डॉ. वेणुधर रौतिया सर सहायक प्राध्यापक (विधि) · पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़)
विधिक विश्लेषक एवं शिक्षाविद | संस्थापक व संचालक: Law Order and Civil Rights
बाल विकास (Child Development) मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसका संबंध बालक के शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक रूपांतरण से है।
(A) अभिवृद्धि या वृद्धि (Growth): इससे तात्पर्य शरीर तथा इसके व्यावहारिक अंगों के आकार, भार, ऊँचाई और संरचना में होने वाले मात्रात्मक (Quantitative) एवं बाह्य परिवर्तनों से है। यह एक निश्चित आयु (लगभग 18-20 वर्ष) तक पहुँचकर रुक जाती है।
(B) विकास (Development): विकास एक व्यापक, निरंतर और बहुआयामी प्रक्रिया है जो गर्भाधान से प्रारंभ होकर जीवनपर्यंत (Womb to Tomb) चलती रहती है। यह मुख्य रूप से गुणात्मक (Qualitative) होता है।
📊 अभिवृद्धि और विकास में मुख्य अंतर
| क्र. | आधार | अभिवृद्धि (Growth) | विकास (Development) |
|---|---|---|---|
| 1 | स्वरूप | बाह्य (External) होता है। | आंतरिक एवं बाह्य दोनों होता है। |
| 2 | प्रकृति | मात्रात्मक (Quantitative) होती है। | गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों। |
| 3 | सीमा | निश्चित आयु के बाद रुक जाती है। | जीवनपर्यंत (मृत्यु तक) चलती है। |
| 4 | मापन | सटीक मापन संभव है (भार, ऊँचाई)। | प्रत्यक्ष मापन संभव नहीं, केवल अवलोकन। |
"जींस और कोशिकाओं का बढ़ना 'वृद्धि' है, पर उनसे कार्य सीखने की क्षमता 'विकास' है! वृद्धि रुक जाती है, विकास चलता रहता है!"
परिभाषा: अभ्यास, अनुभव और प्रशिक्षण के फलस्वरूप व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन (Relatively Permanent Change in Behavior) अधिगम कहलाता है।
प्रमुख विशेषताएँ:
• अधिगम एक सार्वभौमिक (Universal) प्रक्रिया है और जीवनभर चलती है।
• इसका मूल उद्देश्य व्यक्ति को वातावरण के साथ समायोजन करने में सक्षम बनाना है।
1. परस्पर निर्भरता (Interdependence): विकास और अधिगम एक-दूसरे के पूरक हैं। बालक का जैसे-जैसे शारीरिक और मानसिक विकास होता है, उसकी सीखने की क्षमता बढ़ती है।
2. परिपक्वता (Maturation) का योगदान: अधिगम के लिए परिपक्वता पूर्व शर्त है। जब तक बालक का तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियाँ परिपक्व नहीं होतीं, वह लिखना या साइकिल चलाना नहीं सीख सकता।
3. समानुपातिक संबंध: शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बालक में अधिगम की गति तीव्र होती है।
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(1) विकास की प्रत्येक अवस्था के अपने खतरे होते हैं।
(2) विकास उकसाने/बढ़ावा देने से नहीं होता है।
(3) विकास सांस्कृतिक परिवर्तनों से प्रभावित होता है।
(4) विकास की प्रत्येक अवस्था की अपनी विशेषताएँ होती हैं।
व्याख्या: विकास वातावरण, प्रोत्साहन, उकसाने और अधिगम से उत्प्रेरित एवं प्रभावित होता है। इसलिए विकल्प (2) गलत कथन है।
(1) निरंतरता का सिद्धांत
(2) व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धांत
(3) परिमार्जितता का सिद्धांत
(4) एकीकरण का सिद्धांत
व्याख्या: विकास की प्रक्रिया कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है, इसे 'निरंतरता का सिद्धांत' (Principle of Continuity) कहा जाता है।
(1) आनुवंशिक संरचना
(2) जैविक बनावट
(3) बाह्य परिवेश, शिक्षा और सामाजिक अनुभव
(4) जन्मजात विशेषताएँ
व्याख्या: प्रकृति (Nature) का अर्थ आनुवंशिकता होता है, जबकि पोषण (Nurture) का अर्थ बाह्य वातावरण, परिवेश और शिक्षा होता है।
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन सा मात्रात्मक परिवर्तन का एक प्रामाणिक उदाहरण है?
(1) भाषा का विकास होना
(2) बालक की लंबाई और भार का बढ़ना
(3) संवेगों पर नियंत्रण करना(1) अत्यंत अस्थायी
(2) अपेक्षाकृत स्थायी (Relatively Permanent)
(3) क्षणिक
(4) बीमारी के कारण होने वाला परिवर्तन
🎯 सही उत्तर: (2) व्याख्या: अभ्यास और अनुभव के कारण व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन ही अधिगम कहलाता है।
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